नई दिल्ली: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में मिशिगन से जीत दर्ज कर अब्दुल अल सैयद ने इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनकी मुस्लिम पहचान और राजनीतिक विचारधारा को निशाना बनाया था। ट्रंप ने उन्हें ‘रेडिकल जिहादी’ तक कहा था, लेकिन जीत के बाद अब्दुल ने अपने अंदाज में दोनों नेताओं पर तंज कसा।
चुनाव जीतने के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए अब्दुल ने सबसे पहले ‘हबीबी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने जेडी वेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जनवरी में संविधान के मुताबिक उन्हें ही नए सीनेटरों को शपथ दिलानी होगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जेडी, हबीबी! विडंबना देखिए कि जनवरी में आपको ही मुझे सीनेटर पद की शपथ दिलानी होगी।”
दरअसल, अमेरिका में उपराष्ट्रपति सीनेट के अध्यक्ष भी होते हैं और नए सदस्यों को शपथ दिलाने की संवैधानिक जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। अब्दुल ने ट्रंप पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को उनका नाम बोलने में परेशानी होती है, इसलिए शपथ लेने के बाद वह उन्हें सिर्फ ‘सीनेटर’ कहकर बुला सकते हैं।
कौन हैं अब्दुल अल सैयद?
अब्दुल अल सैयद का पूरा नाम अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद है। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1984 को अमेरिका के मिशिगन राज्य के रोचेस्टर हिल्स में हुआ था। उनके माता-पिता मिस्र से आकर अमेरिका में बसे थे। इस तरह अब्दुल का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में ही हुआ।
उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी से जीव विज्ञान और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित रोड्स छात्रवृत्ति मिली और उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जन स्वास्थ्य में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से चिकित्सा की डिग्री भी प्राप्त की।
30 साल की उम्र में बने डेट्रॉइट के स्वास्थ्य प्रमुख
अब्दुल अल सैयद की पहचान राजनीति में आने से पहले जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रशासक के रूप में रही है। साल 2015 में तत्कालीन डेट्रॉइट मेयर माइक डगन ने उन्हें शहर के स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख नियुक्त किया था। उस समय उनकी उम्र करीब 30 साल थी।
उन्होंने आर्थिक संकट से जूझ चुके डेट्रॉइट में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को दोबारा व्यवस्थित करने और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभाली। वह 2017 तक इस पद पर रहे।
इसके बाद 2023 से 2025 तक उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव और पूर्व सैनिक सेवा विभाग के निदेशक के रूप में काम किया। इस विभाग के दायरे में डेट्रॉइट भी शामिल है। वह लेखक और पॉडकास्ट प्रस्तोता भी रहे हैं। उनकी किताबों में ‘Medicare for All: A Citizen’s Guide’ शामिल है।
2018 में गवर्नर का चुनाव भी लड़ चुके हैं
अब्दुल अल सैयद ने 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। उस दौरान उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े के कई बड़े नेताओं का समर्थन मिला था। इनमें बर्नी सैंडर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसे नाम शामिल थे।
हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राथमिक चुनाव प्रक्रिया में उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने जन स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में अपनी भूमिका जारी रखी।
मुस्लिम पहचान को लेकर ट्रंप ने साधा था निशाना
अब्दुल अल सैयद के चुनाव अभियान में आम लोगों को आर्थिक राहत देने और राजनीति में कॉरपोरेट कंपनियों के प्रभाव को कम करने पर जोर दिया गया था। उन्होंने सभी अमेरिकियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था यानी ‘Medicare for All’ की वकालत की। इसके अलावा अमीरों पर अधिक कर लगाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बनाने और इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता बंद करने की मांग भी उठाई।
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने उनकी मुस्लिम पहचान को निशाना बनाते हुए उन्हें ‘जिहादी’ कहा था। उन्होंने मिशिगन के मतदाताओं से उनकी उम्मीदवारी खारिज करने की अपील करते हुए 11 सितंबर के आतंकी हमलों का भी जिक्र किया था।
रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने भी अब्दुल पर मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध होने का आरोप लगाया था। हालांकि, अब्दुल ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि वह कभी इस संगठन के सदस्य नहीं रहे और न ही कभी बनेंगे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी उनकी राजनीतिक सोच और विचारधारा पर सवाल उठाए थे तथा उन पर नस्लीय नफरत फैलाने का आरोप लगाया था।
गाजा में इजरायल की कार्रवाई को बता चुके हैं नरसंहार
विदेश नीति के मुद्दे पर अब्दुल अल सैयद अमेरिका के इजरायल को दिए जा रहे सैन्य समर्थन के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान को ‘नरसंहार’ करार दिया और अमेरिका से इजरायल को मिलने वाली बिना शर्त सैन्य सहायता बंद करने की मांग की।
चुनाव प्रचार के दौरान इजरायल को लेकर उनके इस रुख पर काफी विवाद हुआ। इसके बावजूद उन्होंने अपने चुनाव अभियान में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
प्राथमिक चुनाव में भी दी थी बड़ी चुनौती
साल 2026 में अब्दुल अल सैयद ने मिशिगन से अमेरिकी सीनेट की सीट के लिए चुनाव लड़ा। अगस्त में हुए डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव में उन्होंने पार्टी की स्थापित नेता और सांसद हेली स्टीवंस को हराकर सबको चौंका दिया था।
इसके बाद मुख्य चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स से हुआ। 4 नवंबर को सामने आए नतीजों में अब्दुल ने रोजर्स को शिकस्त देकर सीनेट की सीट अपने नाम कर ली।
इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। वह मिशिगन से डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की खाली हो रही सीट संभालेंगे। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
